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शिमला।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की क्षेत्रीय समिति-I की 27 वीं बैठक का आयोजन कृषि भवन, नई दिल्ली द्वारा केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के तत्वाधान में दिनांक 22 अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस क्षेत्रीय समिति-I की मुख्य बैठक दो साल में एक बार और इसकी मिड टर्म रिव्यू बैठक प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।  इस बैठक का उदघाटन मुख्य अतिथि, माननीय श्री पुरुषोत्तम रूपाला जी, मत्स्य, पशु पालन और डेरी मंत्री भारत सरकार ने श्री कैलाश चौधरी जी, कृषि राज्य मंत्री की उपस्थिति में किया। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री श्री वीरेंदर कंवर जी ने हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी जी ने अपने राज्य उत्तराखंड की अगुवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषि जलवायु क्षेत्र के आधार पर आठ क्षेत्रीय समितियों का गठन किया गया है। इन क्षेत्रीय समितियों का उद्देश्य शोधकर्ताओं एवं राज्य सरकार के पदाधिकारियों को एक फोरम पर लाना है, इसी क्रम में इस समिति का आयोजन प्रमुखता के साथ जिसमें बागवानी, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन पर वर्तमान में हो रहे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संबंधी प्रयासों की कमियों/सीमाओं/ सुधारों की गहराई से जाँच आदि से संबन्धित मुद्दों पर प्रमुखता से विचार विमर्श किया गया। मुख्य अतीथि  श्री रूपाला जी ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को उत्तम बीज उपलब्ध करने पर प्रमुखता दी। इसके साथ ही आर्गेनिक एवं समेकित खेती अपनाकर किसान की आय को कैसे बढ़ाया जाए इस पर भी प्रमुखता से चर्चा की गयी। 

भाकृअनुप के महानिदेशक एवं सचिव कृषि अनुसंधान और शिक्षा निदेशालय, नई दिल्ली डॉ॰ त्रिलोचन मोहापात्र व भाकृअनुप के सभी उप महानिदेशक भी चर्चा में भाग लिया। डॉ ए के सिंह, उप महानिदेशक, बागवानी इस क्षेत्रीय समिति-1 की थीम प्रस्तुत की। क्षेत्रीय समिति–I के सदस्य सचिव, निदेशक, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला ने इस समिति की बैठक का आयोजन किया इस बैठक में कृषि पर आधारित प्रकाशनों एवं तकनीकी का विमोचन भी किया गया। उपरोक्त के अलावा संबधित राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न विभागों के सचिव और अधिकारीगण, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के जीबी के सदस्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति व अधिकारीगण, कृषि, बागवानी, फूलों की खेती, पशु और भेड़ पालन, पशु चिकित्सा, मछली पालन, ग्रामीण विकास, सिंचाई और वानिकी विभाग के वरिष्‍ठ अधिकारी, भाकृअनुप के संस्थानों के निदेशक और भाकृअनुप संस्थानों के क्षेत्रीय केंद्रों के प्रमुख भी समस्याओं के निदान पर सहभागिता की । इसके अतिरिक्त किसान मित्र, प्रेस और मीडिया के सदस्य भी इस कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ें रहे। डॉ॰ एन के पाण्डेय, निदेशक, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला ने समिति की बैठक में सहभागिता कर

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