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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते चिट्टा कारोबार और युवाओं में नशे की बढ़ती लत को रोकने के लिए राज्य सरकार ने अब बड़े स्तर पर सख्त कदम उठाने जा रही है। प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि अब सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पहले अनिवार्य रूप से एंटी-चिट्टा टेस्ट करवाना होगा। भर्ती परीक्षा पास करने के बाद चयनित उम्मीदवारों की ड्रग स्क्रीनिंग की जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम नियुक्ति दी जाएगी।

राज्य सचिवालय शिमला में सोमवार को प्रेस वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए यह कदम जरूरी है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, नर्सिंग, फार्मेसी और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों की भी हर साल ड्रग स्क्रीनिंग करवाई जाएगी। सरकार इसके लिए संस्थानों के माध्यम से नियमित ड्रग स्क्रीनिंग तंत्र विकसित करेगी। मेडिकल टेस्ट पास नहीं करने वालों को कोई सजा नहीं दी जाएगी, उनका इलाज किया जाएगा। सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल पुलिस अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहती है। जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में भी एंटी ड्रग्स परफार्मेंस को शामिल किया जाएगा। संबंधित जिले में चिट्टा तस्करी रोकने, जागरूकता बढ़ाने और नेटवर्क तोड़ने में अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चिट्टा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर पंचायतों को रेड, येलो और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया गया है। जिन पंचायतों में नशे के मामले अधिक पाए गए हैं, वहां लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। पंचायत चुनावों के बाद इन क्षेत्रों में दोबारा जनजागरूकता अभियान शुरू होगा। नशा तस्करों के खिलाफ आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सूचना देने वालों की इनामी राशि 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई है।
प्रतिबंधित दवाओं पर शिकंजा, केमिस्ट और उद्योग रडार पर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित दवाओं के निर्माण और बिक्री में शामिल उद्योगों तथा केमिस्टों पर अब कठोर कार्रवाई होगी। लाइसेंस निरस्त करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक के कदम उठाए जाएंगे।
विभिन्न विभागों के करीब 90 कर्मचारी बर्खास्तगी की जद में
चिट्टा तस्करी या नशे से जुड़े मामलों में शामिल पाए गए विभिन्न विभागों के करीब 90 कर्मचारियों को सरकार नौकरी से बर्खास्त करने जा रही है। मंगलवार को हाेने वाली बैठक में इस बाबत फैसला लिया जाएगा। सरकार अभी तक पुलिस विभाग के 21 कर्मियों सहित 31 को बर्खास्त कर चुकी है।

जमानत पर छूटने वाले तस्करों पर कड़ी नजर
मुख्यमंत्री ने संकेत दिए हैं कि कानून का सहारा लेकर बार-बार रिहा होने वाले तस्करों के खिलाफ भी नई रणनीति तैयार की जा रही है। सरकार ने तस्करों की अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त किया है। आने वाले दिनों में भी यह अभियान जारी रहेगा।

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