शिमला। हिमाचल प्रदेश के 51 शहरी निकायों में चुनाव के लिए अब चार दिन ही शेष रह गए हैं। राज्य में 17 मई को सभी निकायों में मतदान किया जाएगा। ऐसे में शहरी निकाय के चुनाव को लेकर प्रचार के लिए अब दो दिन ही शेष बचे हैं। 15 मई को शाम पांच बजे तक प्रचार अभियान पूरी तरह से थम जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार पर रोक लगाने के लिए पहले से दिशा निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में प्रदेश भर में चुनाव को लेकर सरगर्मियां और भी तेज हो गई हैं। शहरी निकाय के चुनाव को लेकर कुल 1147 उम्मीदवार मैदान में चुनाव लडऩे के लिए तैयार हैं। प्रत्याशियों द्वारा चुनाव प्रचार भी तेज कर दिया गया है। चुनाव जीतने के लिए सभी प्रत्याशियों सहित भाजपा और कांग्रेस भी एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।
दोनों ही प्रमुख दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान अपने अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने का कार्य किया रहा है। राज्य में शहरी निकायों के 449 पदों के लिए ये चुनाव होने जा रहे हैं। हालांकि 10 वार्डों में निर्विरोध सदस्य चुन लिए गए हैं। ऐसे में अब 439 पदों के लिए ही यह चुनाव होंगे। इस चुनाव के लिए कुल 1147 उम्मीदवार अब मैदान में रह गए हैं। इसके अलावा राज्य में शहरी निकाय के चुनाव में कुल 195 महिला उम्मीदवार इस बार चुनाव मैदान में है। राज्य के चार नगर निगमों सहित 25 नगर परिषद और 22 नगर पंचायतों में यह चुनाव प्रक्रिया जारी है।
इलेक्शन के लिए 589 मतदान केंद्र स्थापित
राज्य में शहरी निकाय के चुनावों के लिए राज्य में 589 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। शहरी निकायों के चुनाव के लिए करीब 1300 ईवीएम के माध्यम से यह चुनाव प्रक्रिया संपन्न करवाई जाएगी। प्रदेश भर में 360859 लाख मतदाता अब 439 वार्डों में अपना मतदान करेंगे। इनमें 180963 पुरुष मतदाता, जबकि 179882 महिला मतदाता शामिल हैं। चुनावो में 1808 मतदाता पहली बार अपने मत का इस्तेमाल करेंगे।
कांग्रेस-भाजपा को टक्कर
प्रदेश में शहरी निकाय के चुनाव को लेकर 439 वार्डों में कुल 1147 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। इनमें हालांकि भाजपा और कांग्रेस द्वारा 439 वार्डों में अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं, वहीं निर्दलीय और अन्य पार्टी से 249 उम्मीदवार चुनावी मैदान में है। ऐसे में इस चुनावों में तिकोना मुकाबला देखने को मिल रहा है। राज्य के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां राजनीतिक दलों द्वारा कुछ ऐसे उम्मीदवार खड़े किए हैं जो पांच वर्ष में कहीं भी लोगों के बीच पहले नहीं दिखे हैं ऐसे में इन उम्मीदवारों के लिए निर्दलीय उम्मीदवार भारी पड़ रहे हैं।
