शिमला। अखिल भारतीय दवा विक्रेता संगठन (एआईओसीडी) ने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का फैसला लिया है। एआईओसीडी) के आह्वान पर बुधवार को हिमाचल प्रदेश में भी केमिस्ट और दवा विक्रेता हड़ताल पर हैं। ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री, कॉर्पोरेट डिस्काउंटिंग और नकली दवाओं की बिक्री रोकने की मांग को लेकर यह हड़ताल की जा रही है। शिमला में भी हड़ताल का असर देखा जा रहा है। शहर में मेडिकल स्टोर बंद रहे। इससे मरीजों को दवाइयों के लिए भटकना पड़ा और परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि, आईजीएमसी, केएनएच, डीडीयू में सरकारी दवाइयों की दुकानें खुली रहीं। वहीं हिमाचल प्रदेश केमिस्ट-ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव पंडित ने कहा कि प्रदेश में करीब 10 हजार दवा विक्रेता हड़ताल पर हैं।
नाहन में राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते निजी दवा विक्रेताओं ने बंद रखीं दुकानें
दवाओं की ऑनलाइन बिक्री और बड़े दवा घरानों (ई-फार्मेसी)की ओर से दिए जा रहे भारी डिस्काउंट के विरोध में बुलाई गई राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मुख्यालय नाहन में मिला-जुला असर देखने को मिला। मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज की सरकारी दुकान खुली रहने से मरीजों को कोई दिक्कत नहीं हुई, वहीं ग्रामीण इलाकों के लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर एक दिन के देशव्यापी बंद के तहत नाहन में अधिकांश निजी दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद रखीं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज में सरकारी दवा की दुकान पूरी तरह से खुली रही। इसके चलते मरीजों को दवाओं की निर्बाध आपूर्ति मिलती रही। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज की दवा दुकान से ही आमजन को निशुल्क दवाइयां भी बांटी गईं। शहर में वैकल्पिक व्यवस्था सुचारू रहने से हड़ताल का आम मरीजों पर कोई खास असर नहीं दिखा। शहर में भले ही हालात सामान्य रहे, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दवा की दुकानें बंद रहने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
कुल्लू में मेडिकल स्टोर बंद रहने से मरीजों को उठानी पड़ी परेशानी
जिला कुल्लू केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले जिले में निजी मेडिकल स्टोर को बंद रखा गया। ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में किए गए इस बंद का असर आम लोगों और मरीजों पर साफ देखने को मिला। दवाओं की दुकानें बंद रहने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अस्पताल परिसर में संचालित जेनेरिक दवा केंद्र और निगम की दुकानें खुली रहीं, जहां दवाइयां लेने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। लेकिन कई जरूरी दवाइयां उपलब्ध न होने के चलते मरीजों को निराश लौटना पड़ा। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में रोजाना की तरह बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचे, लेकिन बाजार में मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण उन्हें दवाइयां लेने में दिक्कतें झेलनी पड़ीं। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और इससे दवा वितरण व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। इसी के विरोध में यह बंद रखा गया।
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में दवा काउंटर पर लगी मरीजों की कतारें
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में बुधवार को दवा काउंटर पर मरीजों की भीड़ लगी रही। काउंटर पर मरीज दवा लेने के लिए कतारों में खड़े रहे। अस्पताल के आसपास की सभी निजी दवा दुकानों में तला लगा रहा। यहां तक कि अस्पताल के पर्ची काउंटर के पास बनी दवा की दुकान भी बंद रही। इस कारण कई मरीजों को बिना दवा लिए ही घर लौटना पड़ा।
मंडी के केमिस्टों की सांकेतिक हड़ताल
अवैध और अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को मंडी जिला केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। एआईओसीडी के आह्वान पर जिलेभर के दवा विक्रेताओं ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर आंदोलन का समर्थन किया। सोसिएशन के अध्यक्ष योगेश वर्मा और सचिव परवेश गुप्ता के नेतृत्व में दवा विक्रेताओं ने स्थानीय प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने, बिना वैध चिकित्सीय पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी बंद करने तथा ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स की डीप डिस्काउंटिंग नीति पर नियंत्रण लगाने की मांग उठाई गई। केमिस्टों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की मनमानी के कारण छोटे और लाइसेंसधारी दवा विक्रेताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा है। हालांकि हड़ताल के दौरान भी गंभीर और जरूरतमंद मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता जारी रखी गई। मंडी में हड़ताल शांतिपूर्ण रही। व्यापार मंडल मंडी, फेडरेशन ऑफ मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन मंडी इकाई और हिमरू मंडी इकाई ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।