शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन पर सास-ससुर के अतिक्रमण होने पर बहू को पंचायतीराज चुनाव से महरूम रखने वाले सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा, बहू प्रभावित है तो स्वयं कोर्ट में याचिका दायर करे। यह जनहित याचिका महिला मंडल की ओर से दायर हुई थी। उधर, याचिकाकर्ताओं ने खंडपीठ की टिप्पणी के बाद जनहित याचिका को अदालत से वापस ले लिया। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।
याचिका वापस लेने की मांग को अदालत ने स्वीकार कर दिया
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने दायर जनहित याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार के इस फैसले से याचिकाकर्ता सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं कि नहीं। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यह मामला आम जनता से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि अगर कोई बहू व्यक्तिगत तौर पर इस आदेश से प्रभावित हुई है तो वह अदालत में स्वयं याचिका दायर करें। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इस जनहित याचिका को अदालत से वापस लेने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर दिया।
