शिमला। हिमाचल प्रदेश में जहां कर्मचारी राजनीति राज्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राहें बदल देती है, वहीं इस बार पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में भी कर्मचारी राजनीति हावी रहने वाली है। हिमाचल में इस बार 3754 पंचायतों में चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां सेवानिवृत्त कर्मचारी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में अपनी चुनावी ताल ठोंक रहे हैं। इन चुनावों में पुलिस, एचआरटीसी और शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त कई कर्मचारी चुनावी मैदान में उतर कर कर्मचारी राजनीति के अनुभवों को पंचायती राज संस्थाओं में झोंकने को तैयार हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम की बात की जाए, तो आरएम से लेकर अन्य पदों पर रहे लाहुल-स्पीति के मंगल चंद मनेपा लाहुल स्पीति गांधला से कोकसर सिस्सू वार्ड नंबर-6 से जिला परिषद सदस्य के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
मंगल चंद मनेपा बीते वर्ष ही सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं, पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त देवराज ठाकुर जिला सोलन के अर्की ब्लॉक के सूरजपुर वार्ड से जिला परिषद का चुनाव लड़ रहे हैं। एचआरटीसी से सेवानिवृत्त परिचालक और कर्मचारी राजनीति में सक्रिय रहे नीलकमल ग्राम पंचायत धुंधन से पंचायत उपप्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। देखा जाए तो कर्मचारी राजनीति प्रदेश के चुनाव में हमेशा से अहम रोल निभाती रही है, वहीं इस बार के पंचायत चुनाव में भी कर्मचारी राजनीति पूरी तरह से दबदबा बनाए हुए है।
मुलाजिमों का पंचायत स्तर पर रहता है दबदबा
कर्मचारी राजनीति की बात की जाए, तो ग्रामीण स्तर पर कर्मचारियों का बहुत दबदबा रहता है। सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े होने के कारण गांव की निर्धन जनता कर्मचारियों से बहुत प्रभावित रहती है। ऐसे में कर्मचारी पूरे गांव से लेकर पंचायत और जिला स्तर पर राजनीति कर पूरे चुनावी समीकरणों की धारा को मोडऩे का माद्दा रखते हैं।
